हमास आंदोलन के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख नें कहा है कि ग़ज़्ज़ा की घेराबंदी का अन्त ज़ायोनी सरकार के साथ युद्ध विराम समझौते की प्राथमिक शर्त है। ख़ालिद मशअल नें आज ब्रिटेन के अख़बार डेली टेलीग्राफ़ से बात करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि युद्ध विराम के लिये हमास की शर्ते यह हैं कि ग़ज़्ज़ा की घेराबंदी समाप्त की जाए, क़ैदियों को रिहा किया जाए और फ़िलिस्तीन के विभिन्न क्षेत्रों पर ज़ायोनी सरकार के हमले बंद किये जाएं। उधर ख़बरें हैं कि फ़िलिस्तीन प्रतिरोध के जवानों नें ग़ज़्ज़ा के रफ़ह शहर पर हमले की कोशिश को नाकाम बना दिया है। ख़ान यूनुस में भी बैते लाहिया में भी ज़ायोनियों के हमले को नाकाम बना दिया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लाहिया में ज़ायोनी फ़ौज पीछे हटने पर मजबूर हो गई है। दक्षिणी ग़ज़्ज़ा में हमास के जांबाज़ों नें ज़ायोनी फ़ौज के ठिकानों पर पाँच मीज़ाइल फेंके। स्पष्ट रहे कि अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों और अरब देशों की ख़ामोंशी बल्कि साज़िश के साये तले ग़ज़्ज़ा पर ज़ायोनी सरकार की ताज़ा बर्बरता में अब तक 260 लोग शहीद और 2000 से ज़्यादा लोग गायल हो चुके हैं।
18 जुलाई 2014 - 18:09
समाचार कोड: 624942
हमास आंदोलन के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख नें कहा है कि ग़ज़्ज़ा की घेराबंदी का अन्त ज़ायोनी सरकार के साथ युद्ध विराम समझौते की प्राथमिक शर्त है।